“वन विभाग की लापरवाही से जा रही जानें, अब होगा बड़ा आंदोलन — नीरज तिवारी
हल्द्वानी/भीमताल। हिंदी न्यूज़। उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में आदमखोर बाघ का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। भीमताल ब्लॉक के भटुनी (ज्यौली) गांव में एक बार फिर बाघ ने 30 वर्षीय युवक को मौत के घाट उतार दिया। लगातार तीसरी घटना ने न केवल ग्रामीणों में दहशत फैला दी है, बल्कि वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, भटुनी निवासी कमल सिंह बिष्ट (30 वर्ष) पुत्र इंद्र सिंह बिष्ट गुरुवार देर शाम अपने घर के पास से लापता हो गए थे। परिजनों ने देर रात तक उनकी तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। शुक्रवार सुबह ग्रामीणों और वन विभाग की टीम ने खोजबीन शुरू की, जिसके दौरान जंगल में कमल का आधा खाया हुआ शव बरामद हुआ। इस हृदयविदारक घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बीते 22 दिनों में यह तीसरी घटना है। इससे पहले भी एक महिला और हाल ही में हेमा पांडे नामक महिला को बाघ ने अपना शिकार बनाया था। हैरानी की बात यह है कि ये घटनाएं जंगल के भीतर नहीं, बल्कि गांव के आसपास 3–4 किलोमीटर के दायरे में ही हो रही हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी डर और आक्रोश है।
ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने पहले ही वन विभाग को बाघ की सक्रियता की सूचना दी थी और ठोस कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन विभाग ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। अब लगातार हो रही मौतों के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है।

प्रदेश प्रवक्ता नीरज तिवारी ने घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि“यह बेहद दुःखद और आक्रोशजनक है कि एक के बाद एक तीन लोगों की जान चली गई, लेकिन वन विभाग सिर्फ कागजी कार्यवाही में उलझा रहा। यह सीधी-सीधी प्रशासनिक विफलता है।”
उन्होंने कहा कि अब यह बाघ गांव के अंदर लोगों को निशाना बना रहा है, जो बेहद गंभीर स्थिति है।
“हमने पहले भी मृतक की बॉडी को काठगोदाम चौकी पर रखकर विरोध किया था और बाघ को मारने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।”
नीरज तिवारी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि
“अगर जल्द ही आदमखोर बाघ को मारने के आदेश जारी नहीं किए गए, तो क्षेत्र की जनता एकजुट होकर बड़ा आंदोलन करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और वन विभाग की होगी।”

लगातार हो रही घटनाओं के बाद भटुनी और आसपास के गांवों में लोग दहशत में जीने को मजबूर हैं। शाम होते ही लोग घरों में कैद हो जा रहे हैं और बच्चों व महिलाओं का बाहर निकलना बंद हो गया है।
अब सवाल यह है कि आखिर कब तक वन विभाग की लापरवाही का खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ेगा?


