हल्द्वानी, नैनीताल । हिंदी न्यूज़।सरज़मीन हल्द्वानी में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ के ज़ेरे एहतमाम एक महत्वपूर्ण फिकरी व इस्लाही मजलिस का आयोजन रविवार को मदरसा इहया-उल-उलूम, लाइन नंबर-1 में किया गया। कार्यक्रम में देशभर के प्रतिष्ठित उलमा-ए-किराम, सामाजिक कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। करीब दो घंटे चले इस कार्यक्रम में धार्मिक, सामाजिक और शैक्षिक मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई।

कार्यक्रम में बोर्ड के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी, जनरल सेक्रेटरी मौलाना फज़लुर्रहीम मुजद्दिदी तथा सेक्रेटरी मौलाना उमरैन महफूज़ रहमानी मुख्य रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा जमीयत उलेमा हिंद के जिला अध्यक्ष मौलाना मुकीम व अन्य गणमान्य व्यक्तियों ने भी कार्यक्रम में शिरकत की।
“मदरसा व्यवस्था और कानूनी दायरे पर जोर” मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने कहा कि उत्तराखंड में मदरसों की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मदरसे देश के संविधान और कानून के तहत संचालित शैक्षणिक संस्थान हैं, जिनके साथ किसी प्रकार की अनावश्यक दखलअंदाजी उचित नहीं है।
उन्होंने कहा, “हम उत्तराखंड सरकार से अपील करते हैं कि मदरसों को जो संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है, उसमें किसी तरह की छेड़छाड़ न की जाए। ये संस्थान शिक्षा देने और समाज में नैतिक मूल्यों को स्थापित करने का कार्य कर रहे हैं।”
साथ ही उन्होंने मदरसा संचालकों को भी सलाह दी कि वे अपने सभी दस्तावेज़ और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी रखें, ताकि किसी प्रकार की प्रशासनिक समस्या उत्पन्न न हो।

“मुस्लिम पर्सनल लॉ की हिफाजत और समाज सुधार का संकल्प“
उन्होंने कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्डका गठन 1973 में मुस्लिम पर्सनल लॉ की हिफाजत और समाज में सुधार के उद्देश्य से किया गया था। बोर्ड का लक्ष्य शरीयत कानून के अनुसार जीवन पद्धति को सुरक्षित रखना और समाज में जागरूकता बढ़ाना है। उन्होंने यह भी कहा कि समाज में सुधार केवल धार्मिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि शिक्षा और सामाजिक व्यवहार के माध्यम से भी संभव है।
अमन, मोहब्बत और सुधार का संदेश
जमीयत उलेमा हिंद के जिला अध्यक्ष मौलाना मुकीम ने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य मुस्लिम समाज में जागरूकता लाना और इस्लाम की मूल शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाना है।
उन्होंने कहा कि इस्लाम का संदेश अमन, शांति, भाईचारा, सब्र और त्याग है। समाज में फैली कुरीतियों को खत्म करना भी इस्लाम की शिक्षाओं का हिस्सा है।
उन्होंने विशेष रूप से निम्न बिंदुओं पर जोर दिया जैसे दहेज प्रथा का उन्मूलन, शादियों में फिजूलखर्ची पर रोक ,महिलाओं को समान अधिकार आपसी भाईचारे को बढ़ावा,शिक्षा को बताया तरक्की की कुंजी मौलाना मुकीम ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने पर ध्यान दें।
उन्होंने जानकारी दी कि जमीयत उलेमा हिंद की केंद्रीय इकाई द्वारा हाल ही में लगभग 1 करोड़ 80 लाख रुपये की छात्रवृत्ति वितरित की गई, जिसमें 65 गैर-मुस्लिम छात्रों को भी मेरिट के आधार पर लाभ दिया गया। इससे यह स्पष्ट होता है कि संगठन बिना किसी भेदभाव के शिक्षा को बढ़ावा दे रहा है।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि जिले में जल्द ही सीबीएसई बोर्ड में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों का सम्मान किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि देश के संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के अंतर्गत रहते हुए सभी नागरिकों को अपनी जिंदगी गुजारनी चाहिए। उन्होंने समाज में आपसी प्रेम, सद्भाव और एकता बनाए रखने का संदेश दिया। हल्द्वानी में आयोजित इस फिकरी व इस्लाही मजलिस के माध्यम से स्पष्ट संदेश दिया गया कि समाज की बेहतरी के लिए शिक्षा, सुधार और आपसी भाईचारा अत्यंत आवश्यक हैं। कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक मार्गदर्शन दिया, बल्कि सामाजिक और शैक्षिक सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण पहल प्रस्तुत की।


