वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के साहस और त्याग को किया याद
नैनीताल/रामनगर, हिंदी न्यूज़। पेशावर विद्रोह दिवस के अवसर पर संयुक्त संघर्ष समिति के आह्वान पर गुरुवार को रामनगर में धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली-एनसीआर से गिरफ्तार इंकलाबी मजदूर केंद्र और बिगुल मजदूर दस्ता के नेताओं व कार्यकर्ताओं समेत सभी मजदूरों की रिहाई, न्यूनतम वेतन 24 हजार रुपये मासिक तय करने, ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, महिला मजदूरों को समान काम के लिए समान वेतन और सभी के लिए स्थायी रोजगार की गारंटी की मांग उठाई गई।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश में मजदूरों से कम वेतन पर लंबे समय तक काम लिया जा रहा है और उनकी बुनियादी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनसरोकारों के मुद्दों से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है, जबकि मजदूरों और किसानों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।

वक्ताओं ने पेशावर विद्रोह (23 अप्रैल 1930) को याद करते हुए वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत के आदेश के बावजूद गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों ने निहत्थे आंदोलनकारियों पर गोली चलाने से इंकार कर दिया था, जो कौमी एकता और मानवता की मिसाल है। इस दौरान उनके त्याग और बलिदान को आज के समय में प्रेरणास्रोत बताया गया।
सभा में वक्ताओं ने उत्तराखंड की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के 2 अप्रैल से चल रहे आंदोलन और हड़ताल का भी समर्थन किया और व्यापक एकजुटता की अपील की।
कार्यक्रम को समाजवादी लोक मंच के संयोजक मुनीष कुमार, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की तुलसी छिंबाल, उपपा नेता प्रभात ध्यानी, मौ. आसिफ, महिला एकता मंच की कौशल्या चुनयाल, जगमोहन रावत, कैसर राना, ललित रावत, मौ. जसीम और भूवन चंद्र समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया।
धरने का संचालन इंकलाबी मजदूर केंद्र के रोहित रुहेला ने किया, जबकि कार्यक्रम की जानकारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक ललित उप्रेती द्वारा दी गई।


