आयुष्मान योजना बनी सहारा, डॉ. सारिका गंगवार और मेडिकल टीम की मेहनत से सफल हुआ उपचार
नैनीताल /हल्द्वानी।उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में आज भी जंगल और जंगली जानवरों का खतरा ग्रामीणों के जीवन का हिस्सा बना हुआ है। रोजमर्रा की जरूरतों के लिए घास, लकड़ी और पशुओं के चारे के लिए जंगल जाना यहां के लोगों की मजबूरी है, लेकिन कई बार यही मजबूरी जानलेवा घटनाओं में बदल जाती है।
ऐसी ही एक दिल दहला देने वाली घटना 1 मार्च को चंपावत जनपद के बराकोट क्षेत्र में सामने आई, जब तुलशी नामक महिला जंगल में घास काटने गई थीं। दोपहर करीब 12 बजे अचानक एक गुलदार ने उन पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले से पूरे इलाके में दहशत फैल गई।

गुलदार के हमले में महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं। उनके सिर, चेहरे, गर्दन, कंधे, छाती और पीठ पर गहरे घाव हो गए। सिर के पीछे की त्वचा पूरी तरह उखड़ गई थी, दोनों कानों को भी गंभीर क्षति पहुंची और चेहरे की नसों को भी नुकसान हुआ। घटना की भयावहता देखकर आसपास मौजूद लोग भी सहम गए।
स्थानीय ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाते हुए किसी तरह घायल महिला को गुलदार के चंगुल से छुड़ाया और तुरंत लोहाघाट उप जिला अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार, जरूरी टीकाकरण और एंटी-रेबीज की पहली खुराक दी। महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर और विशेषज्ञ इलाज के लिए हल्द्वानी स्थित चंदन हॉस्पिटल रेफर किया गया। यहां उन्हें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत भर्ती किया गया, जिससे बिना किसी आर्थिक बोझ के उन्हें उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सकी।
चंदन हॉस्पिटल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम ने महिला की गंभीर स्थिति को देखते हुए तुरंत उपचार शुरू कर दिया। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. सारिका गंगवार के नेतृत्व में मेडिकल टीम ने पूरी संवेदनशीलता और विशेषज्ञता के साथ इलाज की कमान संभाली।
2 मार्च को महिला के गहरे घावों की सफाई और प्राथमिक डिब्राइडमेंट की प्रक्रिया की गई। इसके बाद 11 मार्च को एक जटिल और चुनौतीपूर्ण सर्जरी की गई। इस सर्जरी में रोटेशन एडवांसमेंट फ्लैप तकनीक का उपयोग करते हुए चेहरे के क्षतिग्रस्त हिस्से को सफलतापूर्वक कवर किया गया। डॉक्टरों ने मांसपेशियों और त्वचा के फ्लैप का इस्तेमाल कर चेहरे के बड़े सॉफ्ट टिश्यू डिफेक्ट को ठीक किया और ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा किया।
अनुभवी मेडिकल टीम, आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और सतर्क देखरेख के कारण मरीज की स्थिति में लगातार सुधार होता गया।

फिलहाल महिला की हालत स्थिर बताई जा रही है। उन्हें सॉफ्ट डाइट दी जा रही है और चिकित्सकीय सलाह के साथ अस्पताल से छुट्टी देने की प्रक्रिया चल रही है। महिला और उनके परिजनों ने आयुष्मान योजना के तहत मिले निशुल्क इलाज के लिए सरकार और चंदन हॉस्पिटल की पूरी टीम का आभार जताया। उन्होंने विशेष रूप से डॉ. सारिका गंगवार और उनकी टीम को धन्यवाद देते हुए कहा कि यदि समय पर यह मदद और योजना का लाभ नहीं मिलता तो इतने बड़े इलाज का खर्च उठाना उनके लिए संभव नहीं था।
चंदन हॉस्पिटल, हल्द्वानी गंभीर और जटिल चिकित्सा मामलों के इलाज में अपनी विशेषज्ञता और आधुनिक सुविधाओं के कारण क्षेत्र में एक भरोसेमंद संस्थान के रूप में पहचान बना चुका है। इस सफल उपचार ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आयुष्मान योजना और विशेषज्ञ चिकित्सा सेवाओं के सहयोग से गंभीर मरीजों को भी नई जिंदगी दी जा सकती है।
यह घटना पहाड़ के उन हजारों परिवारों की सच्चाई को भी सामने लाती है, जो रोज जंगलों में जंगली जानवरों के खतरे के बीच अपनी आजीविका के लिए संघर्ष करते हैं। ऐसे हालात में आयुष्मान योजना और चंदन हॉस्पिटल जैसे संस्थान जरूरतमंद लोगों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आ रहे हैं।
