नैनीताल/रामनगर।अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने और उनके अधिकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाने के लिए महिला एकता मंच ने विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। मंच की ओर से 8 मार्च को वन ग्राम पूछड़ी तथा 11 मार्च को मालधन चंद्रनगर में सभाएं आयोजित की जाएंगी। इन कार्यक्रमों में महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक अधिकारों के साथ-साथ वर्तमान राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी चर्चा की जाएगी।

वन ग्राम पूछड़ी में आयोजित बैठक के दौरान महिला एकता मंच की कार्यकर्ताओं ने महिला दिवस को व्यापक रूप से मनाने की रूपरेखा पर चर्चा की। इस दौरान धना तिवारी ने कहा कि 8 मार्च का दिन दुनिया भर की महिलाओं के संघर्ष, अधिकार और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस दिन महिलाएं एकत्र होकर अपने अनुभव साझा करती हैं, अपने सुख-दुख बांटती हैं और समाज में अपनी स्थिति को मजबूत बनाने के लिए भविष्य की योजनाएं बनाती हैं। उन्होंने क्षेत्र की सभी महिलाओं से अपील की कि वे अधिक से अधिक संख्या में महिला दिवस के कार्यक्रमों में भाग लें और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।इसी
क्रम में महिला एकता मंच द्वारा जनसंपर्क अभियान भी चलाया जा रहा है। अभियान के तहत कालूसिद्ध गांव में आयोजित बैठक में सरस्वती जोशी ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिसका सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा विभिन्न देशों पर दबाव और हमलों के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान जा रही है और हजारों लोग घायल हो रहे हैं। उनका कहना था कि इन संघर्षों का असर केवल उन देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव भारत जैसे देशों पर भी पड़ता है।उन्होंने

कहा कि युद्ध और अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण कच्चे तेल की आपूर्ति और व्यापार प्रभावित होता है, जिससे भारत में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो जाता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकार और मानवता की रक्षा के लिए दुनिया भर में शांति का माहौल जरूरी है। इसी कारण उन्होंने सुझाव दिया कि 8 मार्च को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव तक सीमित न रहे, बल्कि इसे युद्ध विरोधी दिवस के रूप में भी मनाया जाना चाहिए, ताकि शांति और मानवता का संदेश दिया जा सके।बैठक
में वक्ताओं ने यह भी कहा कि किसी भी युद्ध या संघर्ष का सबसे अधिक दुष्प्रभाव महिलाओं और बच्चों पर पड़ता है। कौशल्या ने कहा कि युद्ध की परिस्थितियों में सबसे पहले परिवार और समाज की कमजोर वर्गों को नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि दुनिया की जनता को मिलकर युद्धों का विरोध करना चाहिए और शांति तथा भाईचारे के संदेश को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक पूंजीवादी और साम्राज्यवादी लूट की नीतियां खत्म नहीं होंगी, तब तक दुनिया में स्थायी शांति स्थापित करना कठिन होगा।महिला
एकता मंच की कार्यकर्ता शांति मेहरा ने क्षेत्र की महिलाओं और आम जनता से अपील करते हुए कहा कि 8 मार्च को प्रातः 11 बजे रामलीला परिसर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर इसे सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम के माध्यम से महिलाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा और सामाजिक भागीदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा की जाएगी और आगे की रणनीति तय की जाएगी।बैठक में महिला एकता मंच की कई सक्रिय कार्यकर्ता उपस्थित रहीं। इनमें शांति मेहरा, दीपा ध्यानी, ममता, धर्मा, दुर्गा, गीता, मनी, श्यामा, लीला, हंसी देवी, पुष्पा, कमला, बचुली, आशा, भागुली, कौशल्या और सरस्वती जोशी सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।
