सुशीला तिवारी अस्पताल में तीन साल में 6084 मौतें! स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल, उच्चस्तरीय जांच की मांग।

नैनीताल/हल्द्वानी । कुमाऊँ मंडल के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल डॉ० सुशीला तिवारी हॉस्पिटल की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूचना के अधिकार (RTI) से प्राप्त जानकारी के अनुसार वर्ष 2023 से 2025 के बीच इस अस्पताल में इलाज के दौरान लगभग 6084 मरीजों की मौत हो चुकी है। इस चौंकाने वाले आंकड़े के सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में गहरी चिंता और नाराज़गी देखने को मिल रही है। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेताओं ने हल्द्वानी में उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपते हुए अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने और मौतों की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीरज तिवारी और कुलदीप तड़ियाल ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि कुमाऊँ और पर्वतीय क्षेत्रों के लाखों लोग इलाज के लिए इसी अस्पताल पर निर्भर हैं, लेकिन अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी, मशीनरी व उपकरणों की कमी और अव्यवस्थित स्वास्थ्य सेवाओं के कारण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता नीरज तिवारी ने कहा कि यदि तीन वर्षों में 6084 मौतें हुई हैं तो यह केवल आंकड़ा नहीं बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर विफलता का संकेत है। पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। और आगे उन्होंने कहा कि पर्वतीय और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार बड़ी उम्मीद लेकर इस अस्पताल में इलाज कराने आते हैं। लेकिन कई बार उन्हें यहां उचित इलाज नहीं मिल पाता और मरीजों की जान तक चली जाती है। उन्होंने कहा कि लोग यह सोचकर यहां आते हैं कि उन्हें बेहतर इलाज मिलेगा, लेकिन कई परिवारों को अपने प्रियजनों को खोकर लौटना पड़ता है, जो बेहद दर्दनाक और चिंताजनक स्थिति है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तत्काल अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी दूर करने, आधुनिक मशीनरी उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी भयावह स्थिति दोबारा न बने।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं हुई और अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार नहीं किया गया तो कुमाऊँ और पर्वतीय क्षेत्रों के लोग तथा सामाजिक संगठन जन आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन और प्रशासन की होगी। ज्ञापन देने वालों में राजेश शर्मा, वसीम अली, रोहित संगवारी, भुवन भट्ट, राजेंद्र पांडेय, गोपाल सिंह, नीरज बिष्ट, भानु पटेरिया और कुलदीप तड़ियाल सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

गौरतलब है कि हाल ही में उत्तराखंड मुखिया पुष्कर सिंह धामी ने भी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए करोड़ों रुपये की योजनाओं का शिलान्यास किया था। ऐसे में अब सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार अस्पताल को बेहतर बनाने की बात कर रही है तो जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी बदहाल क्यों है। कुमाऊँ क्षेत्र के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले इस अस्पताल की स्थिति यदि जल्द नहीं सुधरी तो यह केवल एक अस्पताल का मुद्दा नहीं रहेगा, बल्कि पूरे पर्वतीय क्षेत्र की स्वास्थ्य सुरक्षा पर बड़ा संकट बन सकता है।

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