देहरादून/हल्द्वानी, 11 मार्च। उत्तराखंड विधानसभा सत्र के दौरान हल्द्वानी से विधायक सुमित हृदयेश ने जनहित और क्षेत्रीय विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों को प्रमुखता से सदन में उठाया। उन्होंने सरकार से खिलाड़ियों, आम जनता, पत्रकारों और युवाओं से जुड़े मामलों में ठोस नीति बनाने तथा समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने की मांग की।
विधानसभा में बोलते हुए विधायक सुमित हृदयेश ने सबसे पहले हल्द्वानी स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने कम उम्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। ऐसे खिलाड़ियों को भविष्य में सरकारी नौकरी या अन्य प्रोत्साहन देने के लिए स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए। उनका कहना था कि यदि खिलाड़ियों को समय पर अवसर और प्रोत्साहन मिले तो उत्तराखंड के युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
उन्होंने हल्द्वानी के मिनी स्टेडियम में लगाए गए केज का मुद्दा भी सदन में उठाया। विधायक ने कहा कि केज लगाए जाने से क्रिकेट और फुटबॉल खेलने वाले खिलाड़ियों को भारी असुविधा हो रही है। इसके अलावा गौलापार स्थित अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं में भी कई कमियां हैं। उन्होंने सरकार से इन समस्याओं का जल्द समाधान करने की मांग की ताकि खिलाड़ियों को बेहतर खेल वातावरण मिल सके।
विधानसभा में उन्होंने राशन कार्ड सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि सत्यापन के दौरान आम लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और कई पात्र परिवारों के नाम सूची से हटने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने मांग की कि सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और जनहितकारी बनाया जाए ताकि कोई भी पात्र परिवार अपने अधिकार से वंचित न रह जाए।
विधायक सुमित हृदयेश ने प्रदेश की महत्वपूर्ण नंदा गौरा योजना का मुद्दा उठाते हुए सरकार से पूछा कि इस योजना के तहत अब तक कितने वर्षों का भुगतान लंबित है और पात्र लाभार्थियों को उनका बकाया कब तक दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना से हजारों बेटियों और उनके परिवारों की उम्मीदें जुड़ी हैं, इसलिए भुगतान में हो रही देरी को तुरंत दूर किया जाना चाहिए।
इसके अलावा उन्होंने सदन में पत्रकारों के लिए रहने की व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि पत्रकार लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हैं और समाज तथा सरकार के बीच महत्वपूर्ण सेतु का काम करते हैं। ऐसे में उनके लिए समुचित और सम्मानजनक व्यवस्था होना जरूरी है।
सत्र के दौरान उन्होंने स्मार्ट मीटर के मुद्दे पर भी सरकार से सवाल किया। विधायक ने पूछा कि यदि किसी उपभोक्ता का मौजूदा बिजली मीटर सही ढंग से काम कर रहा है तो उसे जबरन बदलने की अनिवार्यता क्यों बनाई जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि निजी कंपनियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए आम जनता पर अनावश्यक दबाव डाला जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस मामले में पारदर्शी नीति बनाने और जनता की आशंकाओं को दूर करने की मांग की।
विधायक सुमित हृदयेश ने हल्द्वानी में नजूल (भूमिधरी) भूमि के मुद्दे को भी जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि शहर की बड़ी आबादी वर्षों से नजूल भूमि पर रह रही है और सरकार द्वारा मकानों व दुकानों पर लाल निशान लगाए जाने से लोगों में भय और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “लाल निशान लगाने वाली सरकार नहीं चलेगी, लोगों को मालिकाना हक मिलना चाहिए।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि हल्द्वानी की जनता को जल्द मालिकाना हक दिया जाए और इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए ताकि वर्षों से वहां रह रहे लोगों को राहत मिल सके।
अंत में विधायक सुमित हृदयेश ने कहा कि वे विधानसभा के माध्यम से लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे और जनहित के हर विषय पर सरकार को जवाबदेह बनाने का कार्य करते रहेंगे।
