अल्मोड़ा। महिला दिवस पर ‘साधारण महिलाएं, असाधारण अनुभव’ कार्यक्रम में संघर्षशील महिलाओं का सम्मान।अल्मोड़ा, 8 मार्च। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी की महिला शाखा की ओर से अल्मोड़ा स्थित मिलम इन होटल के सभागार में “साधारण महिलाएं, असाधारण अनुभव” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में समाज में संघर्ष करते हुए बदलाव की राह पर चलने वाली महिलाओं के जीवन अनुभवों को साझा किया गया तथा उनके साहस और योगदान को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य उन महिलाओं की संघर्ष गाथाओं को सामने लाना था, जो साधारण जीवन जीते हुए भी असाधारण अनुभवों और कार्यों के माध्यम से समाज में परिवर्तन की दिशा में काम कर रही हैं। वक्ताओं ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को नई दिशा देने के साथ-साथ महिलाओं के संघर्ष और उनकी उपलब्धियों को पहचान दिलाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनते हैं ।
कार्यक्रम में उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष पी.सी. तिवारी ने कहा कि घर-परिवार, समाज और सत्ता से संघर्ष कर आगे बढ़ने वाली महिलाओं के अनुभव समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि जब महिलाओं की वास्तविक कहानियां समाज के सामने आती हैं तो लोगों में संवेदनशीलता और जागरूकता बढ़ती है, जिससे सामाजिक बदलाव की राह मजबूत होती है।
इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक गंगा असनौड़ा थपलियाल तथा महिला एकता मंच की सक्रिय नेत्री ललिता रावत (रामनगर) को उनके सामाजिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया।
अपने संबोधन में गंगा असनौड़ा थपलियाल ने कहा कि उन्हें अपने पिता से संघर्ष की प्रेरणा और आत्मबल मिला, जो उत्तराखंड संघर्ष वाहिनी से जुड़े रहे। उन्होंने बताया कि इसी प्रेरणा और समाज के सहयोग से उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी जनपक्षधर पत्रकारिता को आगे बढ़ाते हुए ‘रीजनल रिपोर्टर’ जैसे मंच को मजबूत बनाया। उन्होंने कहा कि आज भी समाज पूरी तरह अन्याय और अपमानजनक व्यवस्था से मुक्त नहीं हो पाया है, इसलिए संघर्ष जारी रखना जरूरी है ।

उन्होंने कई संघर्षशील महिलाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जीवन में सबसे प्रभावशाली उदाहरण अंकिता की मां जैसी महिलाएं हैं, जो अन्याय के खिलाफ साहसपूर्वक खड़ी होती हैं। उन्होंने सरस्वती देवी के संघर्ष का भी जिक्र किया, जिन्होंने एक कंपनी द्वारा बचत के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी के खिलाफ 370 किलोमीटर की पदयात्रा कर न्याय की लड़ाई लड़ी। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष महिलाओं की ताकत और उनके सामूहिक साहस का प्रतीक है।सम्मानित अतिथि ललिता रावत ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वे किसान-मजदूर परिवार से आती हैं और उनके पति होटल में काम करते थे। उन्होंने कहा कि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान एक न्यायपूर्ण और समानता आधारित समाज का निर्माण है। उन्होंने क्षेत्र में जंगली जानवरों के आतंक के खिलाफ 31 दिसंबर 2023 को किए गए चक्का जाम आंदोलन का जिक्र किया, जिसमें महिलाओं ने सुबह चार बजे से सड़क पर उतरकर गिरफ्तारी देते हुए विरोध दर्ज कराया।
उन्होंने किसान आंदोलन में अपनी सक्रिय भागीदारी का भी उल्लेख किया और कहा कि परिवार का सहयोग ही उन्हें संघर्ष की ताकत देता है।
ललिता रावत ने कहा कि महिलाएं केवल देवी का प्रतीक नहीं हैं, बल्कि समाज में बदलाव की वाहक हैं और समानता व न्याय की स्थापना सामूहिक संघर्ष से ही संभव है। कार्यक्रम का संचालन कृषि वैज्ञानिक ममता जोशी ने किया। अध्यक्ष मंडल में गंगा असनौड़ा, भारती, साक्षी, आनन्दी वर्मा, गोविन्द लाल वर्मा और चंद्रमणि भट्ट शामिल रहे।

इस अवसर पर आनन्दी वर्मा, किरण, रेनू, भारती, गोपाल, पान बोरा, डॉ. दानू, जे.सी., लता कांडपाल, प्रकाश जोशी, ममता, नीलू रस्तोगी, प्रकाश (नैनी), मोहम्मद शाकिब, दिनेश उपाध्याय, गीता, कमला सिलाड़ी, राम सिंह खनी सहित विभिन्न सामाजिक और श्रमिक संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। इसके अलावा चम्पा सुयाल और दीक्षा सुयाल सहित कई महिला कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम के अंत में महिलाओं के संघर्ष, उनके अनुभवों और समाज में बदलाव लाने में उनकी भूमिका पर विस्तृत संवाद हुआ। वक्ताओं ने समाज में समानता, न्याय और सम्मान के लिए निरंतर संघर्ष करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
